विज्ञापन

तुम खुद की राजकुमारी क्यों नही बन जाती..

Apurva bajpai

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेमिसाल हो ,नहीं पता है कितनी अनमोल हों तुम...
        
                                                    
                            
खामोशी में भी जिसे सुना जा सके वो बोल हो तुम...
पहचानो खुद को तारों से करती रहती हो बाते...
अपनी धुन में जीती रहती हो चाहे दिन हो या फिर रातें...
इतना तराशना खुद को कि कभी तुम्हे कोई मलाल न रहे...
तानों की भरी गूँज बदल कर जब तक तारीफ के शब्द न कहे..
तब तक न झुकना जब तक फिजाओं में तुम्हारे ही तरन्नुम गाये न जाए...
रुकना है तुम्हे तब जब तुम्हारे वीरानेपन की आह से तुम्हारी खामोशी के शब्द बन बाहर निकल के आए...
दुआये हैं इबादत है ईश्वर का है साथ...
अपने आप को ही सराह कर आइने से करती रहना बात...
तुम्हारी दूसरे से जुड़ी हर एक आस सही है क्या...
क्या तुम्हे खुद पर इतना भी विश्वास नहीं है क्या...
माथे को बिंदी से सजाने से पहले हाथों में चूड़िया खनकाने से पहले...
पायल को पैरों में छनकाने से पहले और बालों में गजला लगाने से पहले...
तुम अपने ख्वाब चुनना...
साथ खड़ा हो या न कोई तुम किसी की मत सुनना..

एक मोहब्बत ऐसी भी करना अपने आप से तुम
जहां आंखे काजल से ज्यादा सपनो से हो भरी...
मुंतज़िर होना उस मुक़म्मल वक्त की जहां हो केवल मंजिल की हर एक लरी...
मैं ये नहीं कहती कि राजकुमार के सपने देखना बुरी लत है...
पर खुद की खुशियों की जिम्मेदारी उस पर देना भी तो गलत है...
क्यों हर एक लड़की राजकुमार के सपने ही है सजाती ...
तुम खुद की राजकुमारी क्यों नही बन जाती...
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile