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आखिर पहुँचना कहाँ है?

Anurag Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब कुछ शक्ति के इर्द-गिर्द घूम रहा है,
        
                                                    
                            
हर कोई बस शक्तिशाली होना चाहता है,
कोई सत्ता के सहारे,
कोई ऊँचे पद के सहारे,
कोई धन के पहाड़ खड़े करके—
बस आगे निकल जाना चाहता है।
हम दौड़ रहे हैं,
एक-दूसरे को पीछे छोड़ते हुए,
कभी-कभी एक-दूसरे को कुचलते हुए भी,
पर किसी ने यह पूछना ज़रूरी नहीं समझा—
आख़िर पहुँचना कहाँ है?
6 दिन पहले
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