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मेरा सावन कभी ना आया

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बादल बरसते रहे, मौसम बदलते रहे,
        
                                                    
                            
पर मेरा सावन तो कभी आया ही नहीं।
मीत संग ना झूला झूला,
ना कभी कोई गीत ही गाया,
सावन आया, बादल बरसे,
पर मन का मौसम सूना पाया।
ना हाथों में मेहंदी रची,
ना पायल ने कोई धुन सुनाई,
ना किसी ने प्रेम से पुकारा,
ना आँखों में नींद समाई।
दूसरों के आंगन झूले झूले,
हर ओर प्रेम की रुत छाई,
मैं खिड़की पर बैठी चुपचाप,
अपनी ही तन्हाई से बतियाई।
बादल गरजे, बिजली चमकी,
बारिश ने धरती महकाई,
पर जिस सावन की आस थी मन में,
वो दस्तक देकर भी न आई।
मीत संग ना झूला झूला,
ना कभी कोई गीत ही गाया,
सबके सावन रंगीन रहे,
मेरा सावन तो कभी ना आया …।
2 महीने पहले
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