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बदलते रंग

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने जीवन के चित्र-पटल पर,
        
                                                    
                            
हर लम्हें को बदलते देखा है।
दिन को रात, रात को दिन में,
हर रंग को ढलते देखा है।
सूरज को आते देखा है,
चाँद को जाते देखा है।
वक्त की करवट के आगे,
हर रिश्ते को बदलते देखा है।
अपनों को गैर होते देखा,
गैरों को अपना होते देखा है।
गिरगिट के रंगों की क्या बात करुं,
मैंने तो इंसानों को हर पल
रंग बदलते देखा है।
चेहरों पर मुस्कान सजाए,
दिल में मौसम बदलते देखा है।
कभी जिन्हें अपना सब समझा था,
उन्हीं को बहुुत दूर निकलते देखा है।।
एक महीने पहले
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