विज्ञापन

इस कष्ट से ही रात को मैं सो नहीं सकूँ

Anubhav Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक मन है मेरा मैं जिसे समझा नहीं सकूँ,
        
                                                    
                            
आदत है कैसी मैं जिसे भुला नहीं सकूँ।

मैं जानता हूँ क्या है सही और क्या गलत,
पर इस जहाँ को मैं कभी पहचान ना सकूँ।

मैं जानता हूँ इस समय उलझा सा हुआ हूँ,
पर जान के भी मैं इसे सुलझा नहीं सकूँ।

ऐसा नहीं कि मैं कभी कोशिश नहीं करूँ,
इस कष्ट से ही रात को मैं सो नहीं सकूँ
1 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile