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जिन ख्वाबों की कसक दिल में

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश एक ऐसा लफ्ज़ है
        
                                                    
                            
जिसके ज़ुबाँ पर आते ही
न जाने कितने ही रंग-बिरंगे
ख़्वाब ज़हन में आ जाते हैं
दिल के खाली आसमान पर
इन्द्रधनुष से छा जाते हैं

जिन ख्वाबों की कसक दिल में
दबी बड़ी है बरसों से
जिन ख्वाबों की महक दिल में
दबी पड़ी है बरसों से
जिनको देखने की अब शायद
दिल में बची नहीं हिम्मत
ज़हन भी शायद इनको लाने की
जुटा न पाया हो हिम्मत
ऐसे में एक काश दबे पाओं आकर
खोल देता है वो पिटारी
जिसमें सारे ख़्वाब दफ़्न हैं।
-अनमोल
एक महीने पहले
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