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एक ख्वाबों का क़ाफ़िला है तू

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ख्वाबों का क़ाफ़िला है तू
        
                                                    
                            
ज़िंदगी एक सिलसिला है तू

बेदिली और कुछ नहीं है पर
मेरी लग़्ज़िश का ही सिला है तू

हां तू आगोश में तो है लेकिन
मुझको अब भी कहां मिला है तू

मैने सोचा था प्यार है मेरा
पर मेरी जान एक गिला है तू

मेरे जज़्बात सारे मर हैं चुके
और हां इनकी क़ातिला है तू

एक ये बात बतला दे मुझको
क्या मेरे ग़म में मुब्तला है तू
(मुब्तला: ग्रसित/व्यस्त/दुखी)

ऐ गुल-ए-दिल खिला तो है अब हां
पर बड़ी देर से खिला है तू।
-अनमोल
एक महीने पहले
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