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मैं गया नगरी हूं

Ankit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरा नाम गया
        
                                                    
                            
मैं करना चाहती नया
मेरा ऐतिहासिक महत्व है
मुझमें देवत्व है
मेरा सांस्कृतिक महत्व है
मेरा धार्मिक महत्व है
मुझमें बौद्धित्व है
मैं साहित्यिक नगरी हूं
फल्गु नदी के किनारे मैं पसरी हूं
मैं सजी संवरी हूं
पितृ पक्ष मेला में मैं बहुत सजती हूं
मैं दुल्हन सी लगती हूं
मैं जब संवरती हूं
मैं जब सजती हूं
पड़ते हैं फीके शहर सारे
शरमाते हैं शहर सारे
सिद्धार्थ को बुद्ध बनाया मैंने
बुद्ध को शुद्ध बनाया मैंने
मैं गया नगरी हूं
मैं शुरू से संवरी हूं
आईए मेरे पास
होंगे नहीं आप उदास
मुझमें है एक आकाश
मुझमें है एक प्रकाश
मैं सहज कुमार की कर्म स्थली हूं
मैं जानकी बल्लभ की जन्मस्थली हूं
मैं नहीं बदली हूं
मैं वही हूं
मैं बुद्ध की नगरी हूं
मैं गया नगरी हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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