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वतन के लिए

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भाग रहे हम धन के पीछे
        
                                                    
                            
भागना था भगवन के पीछे
भागना था वतन के पीछे
धन मकान सब रह जाएगा यहीं
साथ जाएगी नहीं यह मही
क्या किए
औरों के लिए
क्या किए
वतन के लिए
गरीब जन के लिए
क्या दिए
वतन को
जन जन को
क्या कभी हिसाब किए
नहीं न? तो हिसाब कीजिए
सत्कर्म सदा कीजिए
फल ईश्वर पर छोड़ दीजिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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