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सीखना अभी बाकी है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम समझते थे खुद को विद्वान
        
                                                    
                            
जब विद्वानों के बीच आए तब हुआ भान
हैं हम अनजान , नहीं है उतना ज्ञान
था झूठा अभिमान,थे झूठे प्रतिमान
अभी पढ़ना बहुत बाकी है
अभी बढ़ना बहुत बाकी है
अभी सीखना बहुत बाकी है
अभी लिखना बहुत बाकी है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
16 घंटे पहले
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