हैं हम सभी समान
सबके हैं एक भगवान
तो कोई छूत क्यों है?
कोई अछूत क्यों हैं?
मंदिर अपवित्र कैसे हो जाते हैं?
जब हम मंदिर में जाते हैं
यह भेदभाव क्यों है?
यह अभाव क्यों है?
- सहज कुमार