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पिताजी का अंतिम दर्शन करना भी मुश्किल है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पिताजी का अंतिम दर्शन करना भी मुश्किल है
        
                                                    
                            
क्योंकि नौकरी में फंसा हुआ मेरा दिल है
रोजी रोटी के चक्कर में बेच दिया दिल है
दो पैसे के लिए छोड़ दिया गांव का महफिल है
नौकरी क्या किया, गुलाम बन गया दिल है
"नौकरी न करी,
करी तो ना न करी"
जिसने कहा है
सच कहा है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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