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ईश्वर दरवाजा खटखटाते हैं

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बन कर पवन का झोंका ईश्वर आते हैं
        
                                                    
                            
मेरे दरवाजे को खटखटाते हैं
मैं दरवाजे तक जाता हूं
"हवा है "कह कर अंदर आता हूं
पानी पवन माटी अंबर और अनल ही हैं
ईश्वर मैं समझ नहीं पाता हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
2 सप्ताह पहले
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