इच्छाएं हैं असीमित
जरुरतें हैं सीमित
इच्छाओं का लगा है बाजार
बाजार में ठगने को हैं ठग तैयार
जरूरत की चीजें लाओ
इच्छाओं को दूर भगाओ
इच्छाओं पर नियंत्रण करना है नहीं आसान
हैं ये लोभ समान
इच्छाओं का है आसमान
ये करेंगी हमें परेशान
इनको कम कर जीवन बनाओ आसान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'