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गऊंवा की ओर

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन में उठे रोज हिलोर
        
                                                    
                            
चल चल गऊंवा की ओर
जहां मिले प्यार के छोर
जहां के लोगवा उठे भोरे भोर
जहां बा गंगा मईया के हिलोर
जहां बा प्यार के बागडोर
चलो चलें गऊंवा की ओर
जहां के माटी में बा प्यार पोरे पोर
जहां बा नैनी जोर
चल चल चल गऊंवा की ओर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक दिन पहले
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