विज्ञापन

गजब है जिंदगी

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहर में आकर मैं गांव ढूंढ़ता हूं
        
                                                    
                            
पेड़ों को काट कर मैं छांव ढूंढ़ता हूं
गजब है जिंदगी माता पिताजी थे
तो हम व्यस्त बहुत थे
अब उनका पांव ढूंढ़ता हूं
अब उनका छांव ढूंढ़ता हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
3 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile