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दूध के धुले हुए

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोग ये छल कपट से भरे हुए हैं
        
                                                    
                            
लोग ये इर्ष्या द्वेष से भरे हुए हैं
ये आतंकवाद में पले हुए हैं
हम सब इनसे छले हुए हैं
कौन हैं जो यहां दूध के धुले हुए हैं?
सभी अहंकार में फूले हुए हैं
अपनी संस्कृति को ये भूले हुए हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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