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धर्म के ठेकेदार

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ईर्ष्या द्वेष लोभ मोह अहं पाखण्ड पालते हैं
        
                                                    
                            
पर पूजा करके वे खुद को पवित्र मानते हैं
धर्म के ठेकेदार खुद को भगवान मानते हैं
मंदिरों में इतना दिखावा क्यों है?
मंदिरों में इतना चढ़ावा क्यों है?
भगवान मंदिर मस्जिद में मिलते हैं कहां?
किसान श्रम करते हैं जहां भगवान हैं वहां।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
1 सप्ताह पहले
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