विज्ञापन

अल्पायु के गहन अनुभव

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैंने वक्त से पहले खामियाँ देखी हैं,
        
                                                    
                            
जीने से पहले कमियाँ देखी हैं।
बहुतों की नाकामियाँ देखी हैं,
अपने से ज्यादा नादानियाँ देखी हैं।
सपने से ज्यादा दूसरों की मेहरबानीयाँ देखी हैं,
कुछ करने की निशानियाँ देखी हैं।
मैंने अच्छाई से ज्यादा बुराइयाँ देखी हैं,
हाँ, मैंने वक्त से पहले खामियाँ देखी हैं।
जीने के लिए मरते देखा है,
अशान के लिए तड़पते देखा है।
उष्णता से जलते देखा है,
मौत से लड़ते देखा है।
क्यों, मैंने अल्पायु में ही खुद को दहकते देखा है,
दूसरों से ज्यादा अपने जन को कुढ़ते देखा है।
संभलने से ज्यादा गिरते देखा है,
हाँ, मैंने जीने के लिए मरते देखा है।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all