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बनो फूल और शूल

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्वदेश को रखो आगे
        
                                                    
                            
खुद को रखो पीछे
देश जाएगा आगे
तब तुम कैसे रहोगे पीछे?
देश को आगे बढ़ने दो
नई चढ़ाइयां चढ़ने दो
देश को आगे बढ़ाओ
देश को विकसित बनाओ
खुद का स्वार्थ भूल जाओ
देश के लिए बन शूल फूल जाओ
जरूरत पड़े तो बनो फूल
जरूरत पड़े तो बनो शूल
सब कुछ जाओ भूल
पर देश को न जाओ कभी भूल।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
2 महीने पहले
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