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न हम गुलशन में रहते हैं न हम सहरा में रहते हैं।

Anjum Aligarhi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न हम गुलशन में रहते हैं न हम सहरा में रहते हैं।
        
                                                    
                            
न हम सागर में रहते है.. न हम दरिया में रहते हैं।
कि हम देवों की धरती... वादी-ए-गंगा में रहते हैं।
हमें है गर्व इस पर... हम बड़ी शिद्दत से कहते हैं।
हमारी खुशनसीबी है कि हम एटा में रहते हैं। ---1

यहीं खु़सरोकी धरती है यहीं तुलसीका मसकन है।
यहीं संगीत के स्वर हैं यहीं साहित्य का फ़न है। यहीं वो वाटिका है और यहीं वो सहने गुलशन है।
जहाँ पर अम्न के.और दोस्ती के फूल खिलते हैं।हमारी खुशनसीबी है कि हम एटा में रहते हैं। ---2

यहीं दरगाह ए मारहरा... यहीं कैलाश मन्दिर है।
यहीं'मधुकर'सा रचनाकार है'अंजुम'सा शायर है।
यहीं सोरों यहीं गुरुकुल... यहीं पर जैन मंदिर है। मोहब्बत प्रेम के दरिया.. यहाँ पर साथ बहते हैं।
हमारी खुशनसीबी है कि हम एटा में रहते हैं ---3

यहीं पटना का अभ्यारण्य है घुंघरू की नगरी है।गुलाबों का ये गलियारा है ये खुश्बू की नगरी है।
यही हिंदी की नगरी है.... यही उर्दू की नगरी है ।
यहीं दोहे, ग़ज़ल, नज़्में, कहानी, गीत ...रहते हैं।
हमारी खुशनसीबी है कि हम एटा में रहते हैं। ---4

 
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