विज्ञापन

प्रकाश

Anjana Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज फिर प्रकाश की किरणें बिखर गई
        
                                                    
                            
मैं जो बिखरी बिखरी सी थी निखर गई
किरणों का प्रकाश जो फैला पूरा आकाश
प्रकाशित है धरती का कोना कोना
अंधेरा छंट कर हुआ बौना
सबमें उजाला फैला गया
घोर अंधेरा छंट गया
रहे प्रकाशित हर दम जन जन और तन मन
सुंदर रहे सबका जीवन
कर रहा कौन यह प्रकशित
वही तो है जो हृदय में है प्रतिष्ठित
और दिखता है नहीं कहीं
बस होता है भाषित
जो सबमें है समाया हुआ
हर वक्त प्रकाश फैला रहा
है उस उजाले को कोटि कोटि नमन
संवर रहे जिससे
पोर पोर और संपूर्ण जीवन।
मेरी कलम से
-अंजना सिंह
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13536 कविताएं

View Profile

Aalam-e-Ghazal Parvez

285 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

515 कविताएं

View Profile