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उठो हिंद के वीर सपूतों

Anita Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठो हिंद के वीर सपूतो, अब समय की
        
                                                    
                            
पुकार सुनो
गद्दारों का नाश करने,
तुम अब हथियार चुनो
भूल न जाना वीर शहीदों का
वो गौरवशाली बलिदान
जिन्होने हँसकर दिए प्राण, रखने को
भारत माँ का मान
तुम्हारे कंधों पर टिकी है अब
भारत की पूरी शान
जो आँख उठाए इस माटी पर, मिटा
दो उनका नामोनिशान
झुकना कैसा, रुकना कैसा जब
रगों में हो तूफान
डरना कैसा, मरना कैसा, जब
दांव पे है सम्मान
वार कर प्रहार कर तू पापियों का
संहार कर
धूल में मिला दे उनका दर्प, तू अब ललकार कर!
जो बुरा करे इस धरती का,
उसे तुम मौत की नींद
सुलाओ
युवा शक्ति का प्रचंड बल अब
जग को तुम दिखाओ।
कान खोल के सुन ले दुश्मन
तेरा अंत यह आया है।
भारत माँ के वीर सपूतों
ने शस्त्र अब यह उठाया है।
हमें किसी से भय नही हम
फौलाद के अंगारे है।
तेरी हर साजिश करेंगे नाकाम
हम भारत माँ के प्यारे है।
—जलज यादव 
3 महीने पहले
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