ताकत, हिम्मत, कमज़ोरी या बीमारी,
महक, चमक, धोखा या ईमानदारी।
बुद्धिमानी, बेवफाई, पागलपन या वफ़ादारी,
धर्म, डर, मुस्कुराहट,आँसू या समझदारी।
तस्वीरें, परवाह, शब्द या मौन,
प्यार, खुशी, ज़िंदगी या ध्यान।
पशु, पक्षी, पर्वत, नदियाँ,इंसान,
ग्रह, नक्षत्र और आसमान—सब
समय के आगे धीरे-धीरे फीके पड़ जाते हैं।
जीवित तो बस एक ही है—
जिसे कोई छल नहीं सकता,
जिसे कोई झुठला नहीं सकता।
उसका नाम 'दर्द' है।
जिस दिन ‘दर्द' भी मिट जाएगा,
शायद उसी दिन प्रश्न भी समाप्त हो जाएँगे।
— अनीता 'निधि'