विज्ञापन

बरसात की बहाने

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसात के बहाने
        
                                                    
                            

घन उमड़े, नभ ने बाँहों में
सावन का संगीत भरा,
पगडंडी ने भी भीग-भीगकर
प्रेमिल पथ का मान धरा।

एक छाता तेरे सिर पर,
एक मेरे हाथों में है,
किन्तु भीगता कौन यहाँ—
मन तो एक ही साथ में है।

बूँदों ने जब छेड़ी सरगम,
पत्तों ने ताली बजवाई,
मौन अधरों की मुस्कानों ने
प्रेम-कथा फिर से दोहराई।

न हाथों में कोई वचन था,
न आँखों में कोई शपथ,
बस संग-संग चलते रहने का
जीवन भर का था पथ।

कीचड़, काँटे, ऊबड़-खाबड़,
राहें लाख कठिन हो जाएँ,
साथ अगर विश्वास चले तो
दूर क्षितिज भी घर बन जाए।

प्रेम नहीं केवल उत्सव है,
न फूलों का मधुमय उपवन;
प्रेम वही है—जो वर्षा में भी
थामे रखे जीवन का दामन।

चलो, यूँ ही भीगते रहें,
ऋतुएँ आती-जाती रहें;
जब तक तेरा हाथ है मेरे हाथों में,
हर बरसात हमें
नई वसंत कथा सुनाती रहे।
- अनिता चतुर्वेदी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile