विज्ञापन

आज़ाद स्त्री

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पंद्रह अगस्त की सुबह है,
        
                                                    
                            
आँगन में तिरंगा लहराया है,
आजादी के इस पर्व ने
एक नया प्रश्न उठाया है—

क्या सच में आज़ाद हुई है स्त्री?
जब सपनों पर पहरे हैं,
जब उसके अपने निर्णयों पर
अब भी कितने चेहरे ठहरे हैं।

वह बेटी बनकर जन्मी तो
लक्ष्मी कहकर दुलराई गई,
पढ़ने निकली तो राहों में
कितनी दीवारें पाई गईं।

वह बहन बनी, वह पत्नी बनी,
माँ बनकर संसार सँवारा,
अपने हिस्से की धूप छोड़कर
सबके जीवन में दीप उतारा।

उसने चूल्हे से चाँद तलक
अपनी पहचान बनाई है,
कलम उठाई, नभ छुआ है,
हर सीमा पार कर आई है।

अब उसके पंख न बाँधो तुम,
उड़ने दो खुले गगन में,
जिस भारत का स्वप्न शहीदों ने
देखा था अपने नयन में।

जिस दिन बेटी निर्भय होगी,
जिस दिन नारी सम्मानित होगी,
उस दिन भारत की आज़ादी
सच में पूर्ण, महान होगी।

तिरंगा केवल नभ में नहीं,
हर नारी के मन में लहराए,
उसकी आँखों का हर सपना
भारत का गौरव बन जाए।

आजादी का अर्थ यही—
हर स्त्री को अधिकार मिले,
सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान मिले,
और अपने जीवन का निर्णय
ख़ुद करने का अधिकार मिले।

जय हिन्द! जय भारत! 🇮🇳
नारी सम्मान—राष्ट्र का अभिमान।
-अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Indra Prasad

583 कविताएं

View Profile

Meenu Lodha

201 कविताएं

View Profile

Manju Karnatak

184 कविताएं

View Profile

Prachi Deepak

63 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

देश -

81 कविताएं

View Profile