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दिल में बहुत आग लिए बैठे हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितने टूटे हुए से ख्वाब लिए बैठे हैं
        
                                                    
                            
शाम से परवाने बुझे चिराग़ लिए बैठे हैं
जिनको परवाह किसी बात की होती भी न थी
लोग वही आज कुछ सवाल लिए बैठे हैं
चाल में जिनके कई मंजिलों की आहट थी
वो मुसाफिर भी थके पांव लिए बैठे हैं
धूप जिनका कभी सरमाया हुआ करता था
वो खुद अवारा बादलों की छाँव लिए बैठे हैं
जिनकी किस्मत में मोहब्बत के साए भी नहीं
कितने अपने टूटे दिल में ऐतबार लिए बैठे हैं
क्या क्या धोखे न मिले हमको इस दुनिया में
और हम क्या क्या सब्जबाग लिए बैठे हैं
है नहीं गम हमें हासिल बुझे चिराग़ हुए
हम अपने दिल में बहुत आग लिए बैठे हैं
2 महीने पहले
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