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दिल से नहीं जाता

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल पड़ा था साथ, कुछ तो साथ निभाता
        
                                                    
                            
वो काश हमेशा की तरह लौट कर आता
गिला हमें कभी न रहा सख्त राहों का
बादल कोई भटकता कभी सर पे तो आता
यह देखकर बहुत ही अफसोसजदा हूँ
पिंजरा खुला है तो भी परिंदा नहीं जाता
दो चार आदतें हैं, दो चार फितरतें
दो चार हैं एहसास हर फनकार सुनाता
मिट जाती राहें, बदल जाती हैं मंजिलें
फिर कौन किसके पाँवों के निशान दिखाता
ग़म की है बात तो फिर ग़म क्यों नहीं करें
मिले खुशी तो पाँव कब जमीन पर आता
ग़म की उमर खुशी की तरह चार दिनों की
फिर भी कोई मलाल जो दिल से नहीं जाता
3 महीने पहले
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