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सैलाब ज़िंदगी

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँखों में डर बसा है कि क़ुदरत करेगी क्या
        
                                                    
                            
माहौल है अजीब तो हिम्मत करेगी क्या?

बर्बाद कितना कर गया सैलाब ज़िंदगी
आगे न जाने और ये नफरत करेगी क्या?

आबाद होने में तो लगेंगे कई बरस।
गिरती हुई पहाड़ से आफत करेगी क्या?

सड़कें नहर बनी हैं अजब ज़िंदग़ी हुई
देखेंगे दोस्त और ये ज़ुल्मत करेगी क्या?

ऐसा मिला है ज़ख़्म कि नस्लें करेंगी याद
आँखें ये फिर किसी से मुहब्बत करेंगी क्या?
-पंडित अनिल
एक महीने पहले
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