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क़िस्सा अधूरा

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़ख़्म मेरा मुस्कुराता रह गया
        
                                                    
                            
प्यार का किस्सा अधूरा रह गया।

लोग मुझको गुदगुदाते रह गए
और मैं आँसू छुपाता रह गया।

मेरी क़िस्मत में तमाशे हैं बहुत
क्या पता मैं हूँ कहाँ का रह गया।

प्यार जतलाता भी क्या मैं कम नसीब
होठ मेरा कँपकँपाता रह गया।

सामने मेरे उड़ी खिल्ली मिरी
और मैं था बस ठगा-सा रह गया।
-पंडित अनिल
5 दिन पहले
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