विज्ञापन

वो आन जिसमें

Amit Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो आन जिस में उस अत्यब से बात करता हूँ
        
                                                    
                            
गुमान होता है मैं रब से बात करता हूँ

ये लफ़्ज़-ओ-लहजा हलावत भरा है तेरे लिए
मैं औरों से कहाँ इस ढब से बात करता हूँ

हाँ उस की बातों से होता है दस्तियाब सुकून
प वो समझता है मतलब से बात करता हूँ

तू तो तबीयत-ए-बस्ता से मेरी वाक़िफ़ है
मैं खुल के थोड़ी न यूँ सब से बात करता हूँ

शब-ए-सियह है क़रीं तज़किरे को कोई नहीं
सो माह-ओ-चर्ख-ए-मकौकब से बात करता हूँ

न जाने बात लगी क्या वो हो गए चुप जबकि
'दक़ीक़' मैं सफ़ा-मशरब से बात करता हूँ
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

689 कविताएं

View Profile