विज्ञापन

कभी ख़्वाहिशें अधूरी रह जाती हैं

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लफ़्ज़ वो भी कह जाते हैं,
        
                                                    
                            
जो दिल कभी कह नहीं पाता,
मगर क्या करे ये कमबख़्त दिल
इसकी सुनता ही कौन है...

वो नदारद होकर भी परेशान है,
अपनी ही तक़दीर के फ़ैसलों से,
मियाँ, यहाँ तक़दीर पर
चलता भी भला किसका ज़ोर है...

कभी ख़्वाहिशें अधूरी रह जाती हैं,
कभी अपने ही रूठ जाते हैं,
कभी मंज़िल सामने होकर भी
रास्ते हमसे दूर हो जाते हैं।

मगर यही तो ज़िंदगी का दस्तूर है—
हर दर्द के पीछे कोई सबक़ ज़रूर है,
हर ठोकर में छुपी एक राह है,
और हर इंतज़ार के पीछे
किसी बेहतर कल की पनाह है।

इसलिए ऐ दिल, तू मायूस न होना,
जो मिला उसे शुक्र से अपना लेना,
जो छिन गया उसे सबक़ समझना,
और जो बाकी है
उसे पूरी शिद्दत से जी लेना।

क्योंकि तक़दीर भले हमारे हाथ में न हो,
मगर कोशिश, हौसला और हिम्मत तो अपनी है...
और शायद इसी का नाम ज़िंदगी है
"जहाँ तक़दीर से ज़्यादा
इंसान का हौसला बोलता है।"
-आचार्य अमित
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pankaj Sharma

1223 कविताएं

View Profile