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द्वारका में किया वास रे॥

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कालीका नाग के फन पर नृत्य कर डाला,
        
                                                    
                            
अतताइयों का निरस्त्र किया सब फाँस रे।
बकासुर-पूतना को धूल चटाई,
सब असुर संग कंश का किया विनाश रे॥

दुष्टो को मार भगाया,
वृन्दावन में मचाया रास रे।
धर्म की जब-जब हानि हुई,
धर्मस्थापना कर द्वारका में किया वास रे॥

गोवर्धन एक उँगली पर उठाया,
अहंकार का किया सब नाश रे।
गोकुल का लाल वो पालनहारा,
सत्य का बना विश्वास रे॥

सर्वविदित वो अमिट सर्वशक्तिमान,
जिसकी बाँसुरी से झूमे आकाश रे।
उसके प्यार की धुन पर डोले जग
सभी गोपियों का बना वो खास रे।।
एक महीने पहले
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