विज्ञापन

हकीकत

Aman Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं उसके सामने जाता तो जाता कैसे?
        
                                                    
                            
मैं अपने सपनों को हकीकत बनाता तो बनाता कैसे?

शहरों के मीर झुकते हैं इस फ़कीर के आगे,
मैं उसको ये बात समझाता तो समझाता कैसे?

मैं अपनी मुफ़लिसी का साथी उसको बनाता तो बनाता कैसे?
मैं उसके सामने जाता तो जाता कैसे?
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile