हमारे सपने, तुम्हारे सपने,
हमारी चाहत, तुम्हारी चाहत।
जवा हम भी, जवा हो तुम भी,
करो बगावत, करो बगावत।
कह रही है तुमसे हुकूमत—
जान तुम्हारी, हमारी अमानत।
करो बगावत, करो बगावत।
— अमन यादव