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पहनाये उसने लाढ़ में बाहों के हार से

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिपटी आ बिटिया पीठ पर चुपके से प्यार से
        
                                                    
                            
पहनाये उसने लाढ़ में बाहों के हार से

जगर मगर कर रहे जुगनुओं को देखिये
रोशनी के दीये ला रहे बजार से

रंग खुशबुओं की शीशियों में घोलते
मशगूल गुल देखिये तो कतार से

दस दिशाओं से खुशी बरसे सभी पर
दिन भले भले से लगें त्यौहार से

ठंडी हवाओं के बीच चुस्कियां चाय की
गप शप हो रही हो खास अपने यार से
-आलोक
2 दिन पहले
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