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भार्गव राम खण्डकाव्य

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवन भार्गव राम आश्रम में,
        
                                                    
                            
प्रवीण द्रोण दिव्यास्त्र ज्ञान में।
अनुमति पाइ गुरु परशुराम की,
वापस आये कुरुक्षेत्र गुरुकुल में।।

अनुरोध भीष्म पितामह के,
कौरव पाण्डव सह कर्ण को।
अस्त्र शस्त्र दिव्यास्त्र ज्ञान,
कर्ण को नहीं दिव्यास्त्र ज्ञान।।

निराश कर्ण अब जा पहुँचा,
गिरि महेंद्र विप्र राम के पास।
वेश बनाये था सरल विप्र का,
जँह पाया ज्ञान दिव्यास्त्र का।।

दिवस एक सोये भार्गव राम,
सिर रखा था कर्ण जंघे पर।
नींद खुली जब परशुराम की,
कीड़ा काट रहा था जंघे पर।।

देख रक्त प्रवाह सहनशीलता,
कर्ण नाहीं है बालक विप्र का।
दिया शाप तभी कपटी कर्ण को,
होये विस्मरित ज्ञान दिव्यास्त्र का।।
- अशर्फी लाल मिश्र
2 सप्ताह पहले
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