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चला हो जिस चाल से कदम उठाए

akhilesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रुके थे कदम कुछ पलों के लिए,
        
                                                    
                            
लोग समझ बैठे कि थक गया

चले है मंजिल पाने अब थकना क्या
होस तभी आएगा मंजिल कदमों होगी

चला हो जिस चाल से कदम उठाए
मंजिल ढूंढ रहा हूँ कही नजर तो आए
~कुमार अखिलेश प्रकाश
एक महीने पहले
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