आजकल अजीब दौर है—
लोग रिश्तों में छल रखते हैं,
ज़ुबान पर झूठ रखते हैं,
और हाथों में फूल लेकर
शिव के दरबार पहुँच जाते हैं।
उन्हें कौन समझाए—
महादेव को फूलों से अधिक
मन की सच्चाई प्रिय है।
किसी का विश्वास तोड़कर
शिवलिंग पर चढ़ाया गया फूल
पूजा तो हो सकता है,
भक्ति नहीं।
शिव के चरणों में झुकने से पहले
अपने कर्मों के सामने झुकना सीखिए,
क्योंकि मंदिर में चढ़े फूलों से नहीं,
इंसान के व्यवहार से उसकी आस्था पहचानी जाती है।