तुममें ही सिमटा रहूँ,
तुझसे ही लिपटा रहूँ।
तुझसे ही ज़िंदगी अपनी शुरू करूँ,
तुममें ही ज़िंदगी अपनी समाप्त करूँ।
हर दिल-ए-आरज़ू, ज़िंदगी की
तुझसे ही साझा करूँ।
तेरी ही सहमति लूँ,
तेरी ही सम्मति लूँ,
तेरे ही कदमों के निशान पर
मैं चलता रहूँ।
मेरे इस दिल में हरदम
तेरा ही दीदार करने की तमन्ना रखूँ।
तुझमें ही आबाद हो जाऊँ,
तुझमें ही मैं फ़ना हो जाऊँ।
ऐसी चाहत
दिल में अपने संजोकर रखूँ।