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अगर तुम लौट आओगी

Abhishek Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर तुम लौट आओगी ,
        
                                                    
                            
तो पुष्कर में खिल जायेंगे कमल,
अगर तुम फिर आई तो,
सुनहरी मछलियो से भर जाएगा जल l

तुम्हें प्रेम फिर से हुआ जो ,
पहाड़ों पर फिर बर्फ गिर जायेगी ,
इस पतझड़ को हराकर जैसे ,
बागो में फिर कलियां खिल जाएंगी l

तुम आई जो तो,
छिमियों में आ जाएगा रस,
जैसे सपनों के सैलाबो में,
मेरा मन जाएगा धंस l

तुम्हारा आना ही है,
खुशबू इस पवन की,
जैसे तुम्हें पता चल गया हो,
वेदना ये मेरे मन की,

लेकिन तुम जरूर आना,
जैसे मेघो के आने के बाद आती है बारिश ,
जैसे शरद के शुरू हो जाने पर ,
गर्मी की.नहीं होती है गुंजाइश l

तुम आई जैसे,
कोई बच्चा सुन रहा हो कहानी,
जैसे लहरों में बहते हुए,
फिर आता है पानी l

लेकिन जो तुम नहीं आई तो,
बागो के फूल सब सुख जायेंगे,
और संसार के सारे प्राणी,
तुमसे रूठ जायेंगे l


तुम जो नहीं आओगी,
हवा के झोंको से गिर जायेंगे महल,
ख़ूबसूरत पहाड़ों से गिरते हुए,
झरनों का सुख जाएगा जल l

लेकिन तुम आना,
छू लेना मुझे अपने नरम हाथों से,
तब फिर से खिल आएंगे,
सुंदर फूल इन बागो में l

झरनो में फिर,
आएगा पानी,
पक्षी पशु पुष्प नादियां,
तभी फिर सुनेंगे कहानी l

लेकिन अगर तुम फिर नहीं आये तो,
पेड़ की पत्ते सब गिर जाएंगे,
तुम्हारे विरह को बताते हुए ,
चारो तरफ काले बादल घिर. जाएंगे l

लेकिन तुम जरूर आना,
संसार को विरह स्वीकार करने ना देना,
प्रकृति के नियमो को तुम,
फिर बदलने ना देना l
3 महीने पहले
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