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पूरी कायनात लिख आया हूँ

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन करेगा प्यार यहाँ,
        
                                                    
                            
मैं ग़ज़ल लिख आया हूँ,
प्रेम न जाने कोई शायद,
मैं प्रेमी बन आया हूँ।
निगाह कम है,
ज़रा कम बोलता हूँ,
हँस-हँस के मैं हर दर्द को तोलता हूँ।
दिल का दर्द छुपाकर,
बस मुस्कुराता हूँ,
जो कह न सका लफ़्ज़ों से,
वो पन्नों पर बिखेर आता हूँ।
वो समझते हैं मैं खामोश हूँ,
बस एक अनकहा सा साज़ हूँ,
पर मैं तो उनके नाम पूरी कायनात लिख आया हूँ।
इश्क़ की इन अंजान राहों में,
अब ढूँढता नहीं किसी का साथ,
खुद ही मुसाफ़िर हूँ अपना,
और खुद ही अपनी राह।
खामोशी ही अब मेरी,
सबसे सच्ची हमराज़ है,
तुमने तो सिर्फ हँसी देखी,
मैंने तो हर अश्क में भी देखा एक साज़ है।
2 महीने पहले
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