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मन करे तो कभी भदोही आना

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी बनारस से तुम संगम जाना,
        
                                                    
                            
या संगम से बनारस आना,
मिलना हो अगर हमसे तुमको,
तो बस बीच राह रुक जाना।

पूछना किसी से 'केएनपीजी' कहाँ है,
इस प्यारे कालीन नगर में,
हम बाँहें फैलाए मिलेंगे तुम्हें,
भदोही की हर डगर में।

संग-संग चलेंगे भदोही घूमने,
खुशियों का सैलाब लाऊँगा,
बाबा सेमराध के दर्शन करा के,
गंगा की लहरें घुमाऊँगा।

ढलने न पाएगी दिन की वो लाली,
सीतामढ़ी हम चलेगे,
माता सीता के पावन चरणों में,
हनुमत जी का आशीष पाएँगे।

तंग गलियों के मोड़ों से होकर,
हरिहर नाथ के द्वारे चलेंगे,
जाते-जाते बड़े शिव मंदिर में,
श्रद्धा के दीप जलेंगे।

शाम की सुर्खी बिखरी न होगी,
तो चकवा महावीर ले जाऊँगा,
वहाँ सजे मेले की रौनक और वीरों की कुश्ती दिखाऊँगा।

यहाँ के आलीशान कालीनों का,
एक तोहफा तुमको भेंट करूँगा,
रखोगे याद सदियों तक यह सफर,
ऐसा सत्कार ये मिट्टी करेगी।

सुबह सवेरे जल्दी आ जाना,
इस पावन धरा को निहारने,
मन करे तो एक बार आना,
भदोही देखने।

हाँ,
तुम्हारा मन करे तो कभी भदोही आना...

फिर लेकर तुमको संग अपने,
मैं ज्ञानपुर की सैर कराऊँगा,
वहाँ के तीखे-चटपटे गोलगप्पों का,
तुम्हें लजीज़ स्वाद दिलाऊँगा।

वो तीखा पानी, वो खस्ता पूरी,
खाकर तुम्हारा मन झूम उठेगा,
लौंगलता भी
फिर,
हां,
हाथों से बने उस भोजन का,
तुम्हें जी भर के स्वाद चखाऊँगा,
अपने पलकें बिछा,
ममता की छाँव दिलाऊँगा।

बस मन करे तो एक बार,
तुम भदोही आना,
अपनों जैसी इस चाहत का,
तुम दिल से लुत्फ़ उठा जाना।

हाँ,
तुम्हारा मन करे तो कभी आना...
इस माटी की ओर घर का,
तुम सच्चा स्वाद पाने आना।

हमारा महमान बनकर,
इस माटी का स्नेह पाना।
1 सप्ताह पहले
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