विज्ञापन

एतबार मुझे करना था

Abhishek Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एतबार,
        
                                                    
                            
इतना करने लगा हूँ,
अर्थ,
भूल बैठा।

दिन - रात यूँ ही,
बित रही,
भागी हो मेरी,
एतबार।

कसम का वादा,
कम है,
क्या?
अपने किरदार भूला चलू।

तरस खा कमसम से,
तनहा हूं,
कम है,
क्या।

इता नही,
एतबार मुझे करना था,
क्यों कहे?
हो गया एतबार।

बरसात खत्म होने तक,
कल से पहले तका,
तु क्या कहे,
बस इतना ही।

रहने दो,
बस,
क्या आपने हो अब,
एतबार।
6 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12614 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

29 कविताएं

View Profile