विज्ञापन

वक़्त से जद्दोजहद

Abhay Gaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त से जद्दोजहद:
        
                                                    
                            
वक़्त रेत से भरी मुट्ठी है तेरी
और इसे सम्हालना है तुझे
माना ज़िंदगी का सफ़र है मुश्किल
पर मुसलसल चलते रहना है तुझे

पग पग पर मिलेंगे कंकर बहुत
और उनसे ही रास्ता बनाना है तुझे
सफ़र लंबा हो और थक जाओ अगर
तो ख़ुद ही बनाना होगा आशियाना तुझे

गुज़रे हुए लम्हे वापस नहीं आते
हर एक पल को सँवारना है तुझे
मिलेगी मंजिल पर ये याद रहे
ख़ुद पर रखना होगा यकीन तुझे

वक़्त की होती तो है हर शह ग़ुलाम
पर उसकी गिरफ़्त से निकलना है तुझे
वक़्त के होते है कल और आज
उस काल चक्र को रोकना होगा तुझे

वक़्त का होता है हर शह पर राज
बनना होगा उसका राजा तुझे
बीच भँवर में फँसा हो कोई अगर
तो बनना होगा उसका सहारा तुझे

रोशनी मिट जाती है ढलते हुए सूरज की
शबे तारीकी में अवधी,रौशन शमा बनना है तुझे
-अभय ‘अवधी’
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile