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रिंद मयखाने के

Abhay Gaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मयकदे की हर साक़ी जाने है मुझे
        
                                                    
                            
प्याले की हर मीना पुकारे है मुझे
जमाना पूछे है हमसे हमारी पहचान
मैं हूँ वो रिंद हर मयखाना चाहे है जिसे
प्यासे दिलो को नज़रों से ऐसे पिला साक़ी
कि शेख बन जाए रिंद हर ख़ुम-ख़ाने के
-अभय’अवधी’
3 महीने पहले
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