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क्या मैं खिलौना हूँ ?

5942_ Abhishek

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक पल प्यार करते हो,
        
                                                    
                            
एक पल नज़रअंदाज़ करते हो,
जैसे लगता है खिलौना हूँ,
इस तरह बेकार रखते हो।

कुछ पल ढलेंगे,
फिर मैं ही याद आऊँगा,
जो आज तुम्हारी आदत हूँ,
कल तुम्हारी ज़रूरत बन जाऊँगा।

तुम हँसकर टाल दोगे मेरी बातें,
पर रातों में मेरा ख़याल आएगा,
जिसे आज तुम समझ नहीं पाते,
वही कल सबसे ज़्यादा याद आएगा।

फिर शायद तुम पुकारोगे मुझे,
और मैं खामोश रह जाऊँगा,
क्योंकि जिस दिल को तुमने खेल समझा,
वो एक दिन खेलना छोड़ जाएगा।
2 महीने पहले
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Prasoon Saxena

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