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Happy Shrikrishna Janmashtami 2026: कृष्ण प्रेम का पर्व हैं तो राधा महापर्व हैं

काव्य डेस्क

Sahitya
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                                                  कृष्ण निर्मोही हैं, इसीलिए कृष्ण से मोह हो जाता है। कृष्ण प्रेम की प्रवाहमान सरिता हैं। व्याकुल कंठों और तृषित उरों की सुध लेती संवेदना की सरिता। पर जैसा हर नदी की नियति है। उसे बहना है। यात्रा उसका धर्म है और प्यास मिटाना उसका कर्म। वैसा ही घटित होता है कृष्ण के साथ भी, वो अपने प्रिय को छोड़ देते हैं। पर उनका छोड़ना ऐसा है कि वो छोड़ने के बाद भी सदैव साथ बने रहते हैं। यह वियोग का योग है। ये आकार का निराकार हो जाना है। ये स्थूल का सूक्ष्म में बदल जाना है। एक देह में एक दुनिया का बस जाना। कृष्ण तो निर्मोही हैं। मोह की खेती करने वाला कृषक। उसे मोह नहीं होता। वो मोह उपजाता है। उसे दुःख नहीं होता, वो दुःख निवारता है। कृष्ण समय की सांकल में नहीं बंधते।

~ अनुराग अनंत

2 महीने पहले
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