क्या वह चाँद, सितारों, प्रेम और ख़ूबसूरत एहसासों की दुनिया है? या वह भूखे आदमी की ख़ाली थाली में झाँकने का साहस भी है?
क्या शायरी का काम सिर्फ़ दिल बहलाना है, या वह उन लोगों की आवाज़ भी बन सकती है, जिनकी आवाज़ सत्ता के गलियारों तक पहुँचते-पहुँचते दम तोड़ देती है?
हिंदी-उर्दू कविता की दुनिया में एक शायर ऐसा भी हुआ, जिसने ग़ज़ल को महफ़िलों से निकालकर गाँव की पगडंडियों, किसानों के खेतों, दलित बस्तियों और भूखे आदमी की चौखट तक पहुँचाया।
अदम गोंडवी का मूल नाम रामनाथ सिंह था। उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए इस कवि ने उस भारत को अपनी कविता का विषय बनाया, जो चमकदार विकास-कथाओं में अक्सर दिखाई नहीं देता। और शायर पूछता है-
जो उलझकर रह गई है फ़ाइलों के जाल में
गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में
बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गई
रमसुधी की झोंपड़ी सरपंच की चौपाल में
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से
https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o
4 दिन पहले