विज्ञापन

सोशल मीडिया: प्रेम में तीसरा कोण कसाई का ठीहा होता है

रत्नेश मिश्र

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  दिन बीतते रहे और एक दिन वो भी आया 
जब देह की देहरी लांघ गई उलझन 

गली के नुक्कड़ से दाहिने हाथ मुड़ कर आठवें मकान में 
एक कहानी ने जन्म लिया 
और एक लड़की दुपट्टे से लटक गई 

एक मौत ने दूसरी जिंदगी को बुलाया
और शाम होते होते 
एक लड़का शहर के पुराने पुल से 
एक कविता और एक ख़त छोड़ कर कूद गया 
विज्ञापन

ख़बर सबको थी 
पर ख़बर नहीं बनी 

प्रेम में तीसरा कोण कसाई का ठीहा होता है
और जरूरी नहीं कि 
हर बार वहां कोई लड़का या लड़की हो 
समाज भी होता है 

सभ्यता की चापड़ लिए 
संस्कृति की लुंगी लगाए 
और मान मर्यादा की तोंद पर हाथ फेरते हुए 

जब जब मरते हैं प्यार करने वाले 
दुनिया की आंखों से एक अंजुरी आंसू सूख जाता है 

- अनुराग अनंत की फेसबुक वाल से साभार 

8 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Chandra prakash

28 कविताएं

View Profile